स्टार्टअप और बिज़नेस यह दोनों शब्द व्यवसाय से जुड़ी हुई है परंतु इन दोनों में कुछ अंतर है आज हम इस लेख के द्वारा समझेंगे कि आखिर स्टार्टअप और और बिज़नेस या कहें स्मॉल बिज़नेस में क्या अंतर होता है
21वीं सदी में स्टार्टअप का चलन बहुत हो रहा है जैसा कि हम लोग जानते हैं समय के साथ सब कुछ बदलता है इसी तरह व्यवसाय के क्षेत्र में भी बहुत कुछ नए बदलाव हुए हैं जिनमें से एक है बिज़नेस को स्टार्टअप के रूप में देखना आज बहुत से लोग भारत वर्ष में समझते हैं कि बिज़नेस और स्टार्टअप एक है,
स्टार्टअप और बिज़नेस में अंतर
कई हद तक यह सही भी है लेकिन वर्तमान के समय के अनुसार अगर चले तो कुछ अंतर जरूर है जिन्हें हम कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के द्वारा समझेंगे.
1 .नयापन
साधारणतः अगर देखा जाए तो हर बिज़नेस किसी पुराने मॉडल पर ही आधारित रहता है इसमें कुछ नया नहीं रहता है जैसे कि किराने की दुकान हो या फर्नीचर की दुकान ऐसा कोई कारोबार या रोज़गार जो पुरखों के जमाने से चली आ रही है या फिर मैंने स्टार्ट की है आपने स्टार्ट की है लेकिन छोटे स्तर पर है उसे बड़ा तो बनाया जा सकता है लेकिन इतना बड़ा नहीं बनाया जा सकता जितना की एक स्टार्टअप को बड़ा बनाया जा सकता है
क्योंकि उसमें कुछ नयापन नहीं है पुराने मॉडल पर ही चल रहा है वहीं अगर देखे तो एक स्टार्टअप जिसमें कि नयापन बहुत जरूरी होता है हर स्टार्टअप किसी Entrepreneur के द्वारा नए आइडिया पर आधारित होता है
जितना मजबूत आइडिया होगा उतना ही सक्सेसफुल उतना ही अच्छा चलने वाला वह स्टार्टअप होता है
आज हमारे बीच बहुत से नए स्टार्टअप है जो की नई बिज़नेस आइडिया business ideas से उत्पन्न हुई है जैसे कि आप अगर देखें ऐसे बहुत सी Startup Company example है जैसे की Paytm, Uber, OYO, Zomato
इनके बारे में आप Wikipedia पर जा कर पढ़ सकते है और भी बहुत सारे स्टार्टअप जो कि अभी चल रहे हैं और आप रोज उनका नाम सुनते हैं यह सब स्टार्टअप अपने नयापन के वजह से ही पहचाने जाते हैं
2. जोखिम
हम जानते हैं कि हर व्यवसाय में जोखिम होता है परंतु बिज़नेस की तुलना में एक स्टार्टअप में बहुत ज्यादा जोखिम होता है किसी भी बिज़नेस में लाभ हानि जो भी हो छोटे स्तर पर होता है परंतु अगर देखा जाए तो एक स्टार्टअप के फेल होने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं
3. विस्तार
एक बिज़नेस का विस्तार आप जितना नहीं कर पाते हैं उससे कहीं गुना ज्यादा आप स्टार्टअप का विस्तार कर सकते हैं एक बिज़नेस का विस्तार कुछ ही लोगो पर निर्भर करता है और उनके आस पास के उपभोक्ताओं तक ही उनका व्यवसाय निर्भर होता है है जबकि दूसरी तरफ एक स्टार्टअप के विस्तार के सीमा को मापा नहीं जा सकता
एक स्टार्टअप का विस्तार तब तक होते रहता है जब तक की वो अपने छेत्र में लीडर नहीं बन जाता है.
4. जिंदगी का तरीका
एक बिज़नस में आप एक तय समय तक ही काम करते है जिसमे आप स्वतंत्र होतें है अपने परिवार को समय देने के लिए
बिज़नेस में रिस्क कम होने के कारण आपको मानसिक तनाव कम मिलता है जबकि वही दूसरी तरफ एक स्टार्टअप करने से आपको शुरुवाती समय के कुछ सालों में आपको अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है जिसका कारण रिस्क ,पैसे की कमी,उपभोक्तावों की कमी इत्यादि और भी बहुत से कारण होते है पर ये सब तनाव तब तक होता है जबतक की आपका स्टार्टअप थोडा मजबूत नहीं हो जाता है.जैसे ही आपका स्टार्टअप लाभ प्राप्त करने लगता है उसके बाद आपकी परेशानी धीरे धीरे कम हो जाती है.
5. जीवन चक्र
एक समीछा में देखा गया है की एक बिज़नेस की बंद होने की संभावना 3 सालों में 32 प्रतिशत होती है जबकि दूसरी तरफ स्टार्टअप के बंद होने की सम्भावना 3 सालों में 92 प्रतिशत हो जाती है जो की बिज़नेस से काफी ज्यादा है.
6. प्रबंधन
अगर हम देखे तो एक बिज़नेस में काम करने वालों की संख्या उनकी रोज़मर्रा की आवश्यकता के अनुसार होती है उतने ही लोग काम करतें है जितने की जरुरत है क्योंकि उनकी लाभ का प्रतिशत और बड़े होने की संभावना कम होती है
वही दूसरी तरफ एक स्टार्टअप में काम करने वालों की संख्या धीरे धीरे बढती रहती है जिसका कारण उसकी उन्नति की गति है और भी ऐसे बहुत से काम होतें है एक स्टार्टअप में जिनके लिए बहुत से लोगो की जरुरत पड़ती है समय के अनुसार
7. फायदा
जैसा की हम जानते है की एक बिज़नेस हम जल्द मुनाफ़ा कमाने के लिए शुरू करते है जिसके कारण हर बिज़नेस में मुनाफ़ा शुरुवाती चरणों से होने लगता है जिसके कारण वो बिज़नेस सफल व्यवसाय कहलाने लगता है
जबकि एक स्टार्टअप को अपनी पहली कमाई के लिए सालों तक लग जातें है हर स्टार्टअप अपनी शुरुवाती समय में कोई मुनाफ़ा नहीं कमाती जब वो स्टार्टअप सही तरीके से अपने उपभोक्तावों तक पहुँच जाती है तब वो स्टार्टअप मुनाफ़ा कमाती है जो की लाखों करोड़ो में होती है.
8. वित्
एक बिज़नेस अकेला व्यक्ति से भी स्टार्ट किया जाता है या कुछ लोगो को मिला के भी किया जाता है बिज़नेस में लाभ नुक्सान ये दोनों चीजें उन कुछ लोगो पर ही निर्भर करता है बिज़नेस को ज्यादा बड़ा न करने की सोच से उसमें रिस्क कम होता है जिसके कारण एक बिज़नेस शुरू करने के लिए आप परिवार के किसी सदस्य या कोई दोस्त या फिर बैंक से लोन ले सकते है जिसे आप बिज़नेस के लाभ प्राप्त होने पर आप इंटरेस्ट समेत चुका सकते है
वही दूसरी तरफ एक स्टार्टअप को शुरू करने के लिए शुरुवाती चरणों में तो बहुत कम पैसा लगता है परन्तु जब आपका स्टार्टअप बड़ा होने लगता है तब आपको एंजेल इन्वेस्टर या वेंचर कैपिटलिस्ट की जरुरत पड़ती जो आपके स्टार्टअप में इन्वेस्ट कर सकें
एक स्टार्टअप समय के अनुसार जैसे जैसे बड़ा होने लगता है उसमे इन्वेस्ट की जरुरत पद्रती रहती है जो की असीमित होती है.
9. वृद्धि की दर
एक बिज़नेस जल्दी लाभ कमाने के लिए शुरू किया जाता है जिसके कारण बिज़नेस में वृद्धि दर एक सिमित स्थिति तक होती है चुकी वह बिज़नेस पुराने मॉडल पर ही चल रहा है इसी कारण उसके उपभोक्तावों की कमी होती है साथ ही बाजार में उसी बिज़नेस की प्रतिद्वंद्वी की भरमार होती है जिसके कारण एक बिज़नेस उतना बड़ा नहीं हो सकता
वही दूसरी तरफ एक स्टार्टअप की वृद्धि की सीमा असीमित होती है क्योंकि वो स्टार्टअप एक नए आइडिया को लेकर शुरू की गयी थी जिसके कारण लोगो के नजर में बिज़नेस मॉडल नया होता है और उसके प्रतिद्वंद्वी भी नहीं होतें है या फिर कम होतें है जिसके कारण एक स्टार्टअप एक क़स्बा से निकल कर शहर उसके बाद पुरे देश और अंत में संभव हो तो पूरी दुनिया में फ़ैल सकता है
10. प्रोद्योगिकी
चुकीं एक बिज़नेस पुराने मॉडल पर ही चलता है जिसके कारण उस बिज़नेस में नए नए तकनीक की आवश्यकता उतनी नहीं होती है.
वही दूसरी तरफ एक स्टार्टअप की शुरुवात नए तकनीक या प्रोद्योगिकी के साथ ही होती है बिना तकनीक के कोई स्टार्टअप हो ही नहीं सकता अभी के समय में.
निष्कर्ष :-
इस लेख में लिखे 10 बिन्दुवों के सहारे मैंने आपको ये बताने का प्रयास किया है की स्टार्टअप और बिज़नेस में क्या अंतर है
अगर देखा जाय तो एक बिज़नेस स्टार्टअप का रूप ले सकता है अगर उस बिज़नेस में इन 10 बिंदुओं में बताये गए बातों पर आधारित बदलाव कियें जाय तो
Tags Business Career StartUpSubscribe Our Newsletter